टोक्यो में आयोजित ओलंपिक, खिलाड़ियों के बेहतरीन प्रदर्शन से चारों ओर अपनी चमक बिखेर रहा है। इसी टोक्यो ओलंपिक में मीराबाई चानू ने पहले ही दिन सिल्वर मेडल जीतकर भारत को गौरवान्वित कराया है।

जानकार अभी भारत द्वारा और भी पदक जीते जाने के अनुमान लगा रहे हैं पर आपको पता है कि यह जो पदक जापान टोक्यो ओलंपिक द्वारा खिलाड़ियों को दिए जा रहे हैं इनकी बनावट की संरचना कैसी है।

आज हम इसी अपने इसी आर्टिकल में टोक्यो ओलंपिक में खिलाड़ियों को दिए जाने वाले मेडल की संरचना एवं अन्य विशिष्ट जानकारियां आप तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे। वैसे तो किसी भी खिलाड़ी द्वारा जीता गए किसी भी मेडल की कीमत का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता।

क्योंकि यह उसकी कड़ी मेहनत का फल होता है, पर तब भी आपको जानकर हैरानी होगी कि जो गोल्ड मेडल ओलंपिक कमेटी द्वारा खिलाड़ियों को दिया जाता है ,वह पूर्णतया गोल्ड से नहीं बना होता है , दरअसल वह मेडल असली में सिल्वर मेडल होता है और उस पर सोने की पॉलिश होती है।

अन्तर्राष्ट्रीय ओलंपिक कमेटी द्वारा मेडल का निर्माण करने के लिए कुछ निर्धारित मानक निर्धारित किए गए हैं:

जिसके अनुसार गोल्ड मेडल में कम से कम 6 ग्राम सोना होना आवश्यक है और बाकी का पदार्थ चांदी से बना होना चाहिए। इस मेडल का डायमीटर 60 मिली मीटर होना चाहिए और इसकी मोटाई 3 मिलीमीटर होनी चाहिए।

इसके साथ ही साथ मेडल की एक तरफ जीत के ग्रीक देवता नायकी की तस्वीर, उस स्टेडियम के साथ होनी चाहिए जहां पर 1896 में पहली बार ओलंपिक आयोजित हुए थे। मेडल के दूसरी तरफ ओलंपिक का ऑफिशियल लोगो होना चाहिए और इसके साथ ही साथ जिस वर्ष ओलंपिक आयोजित हुआ है उस वर्ष का भी निर्धारण मेडल में होना चाहिए।

टोक्यो ओलंपिक में दिए जाने वाले मेडल अन्य ओलंपिक मेडल से विभिन्न क्यों है

आपको जानकर हैरानी होगी कि जो मेडल टोक्यो ओलंपिक में खिलाड़ियों को दिए जा रहे हैं वह इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स को रिसाइकल करके बनाए गए हैं। इन मेडल्स को बनाने के लिए ओलंपिक कमेटी द्वारा भारी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक गैजेट को जनता द्वारा दान में लिया गया है।

टोक्यो ओलंपिक मेडल की डिजाइनिंग के लिए जापान ने कुल 400 से ज्यादा सुझावों का निरीक्षण किया है और तब जापान के जाने-माने डिजाइनर जोविनी किवानाशी को मेडल को डिजाइन करने का कॉन्ट्रैक्ट दिया गया है।

मेडल में प्रयुक्त फीता भी जापान द्वारा एक निश्चित मानक के तौर पर निर्धारित किया है , मेडल में प्रयुक्त फीते की डिजाइन जापान की संस्कृति का निर्धारण करती है, जिसका मतलब होता है विविधता में एकता और इसके साथ ही साथ तीनों मेडल्स के लिए अलग-अलग फीतों की डिजाइनओं का निर्धारण किया गया है जिसके करण कोई भी व्यक्ति मात्र फीतों को छूकर बता सकता कि कौन सा गोल्ड मेडल है या सिल्वर मेडल!

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