आइए आज हम आपको वास्तु के बेहद उपयोगी जानकारी देते हैं जो आपके जीवन में बहुत ही उपयोगी सिद्ध होगी ।

हिन्दू धार्मिक मान्यता के अनुसार वास्तु शास्त्र का हमारे जीवन में बहुत महत्व हैं। जिसका हमारे जीवन में बहुत अलग ही परिणाम मिलता है ।

जीवन में हर कोई व्यक्ति अपने जीवन में सुख शांति और सौहार्द्र सम्रद्धि की कामना करता है। जिससे वह व उसका परिवार खुशहाल जीवन व्यतीत कर सके यह कामना करता है।

वास्तु विज्ञान से घर के अशांत वातावरण को शांति और खुशहाली में परिवर्तित किया जा सकता है। यह घर की नकारात्मक ऊर्जा को सकारात्मक ऊर्जा में बदलने के लिए बेहद कारगर विज्ञान है। दरअसल, वास्तु का शाब्दिक अर्थ निवासस्थान होता है। इसके सिद्धांत वातावरण में जल, पृथ्वी, वायु, अग्नि और आकाश तत्वों और उनकी दिशा के बीच एक सामंजस्य स्थापित करने में मदद करते हैं। इन्हें हम वास्तु टिप्स (Vastu Tips) के नाम से जानते हैं। यहां कुछ वास्तु टिप्स दी जा रही हैं जिन्हें अपनाकर आप अपने जीवन में सकारात्मक ऊर्जा को ला सकते हैं। अपने घर की अशांति को दूर कर सकते हैं। ये वास्तु टिप्स हैं:

17. अतिथियो मधुर संबंधों के लिए अतिथियों का स्थान या कक्ष उत्तर या पश्चिम की ओर बनाना चाहिए।

16. आरोग्य के दिशा क्षेत्र उत्तर-पूर्व दिशा में दवाइयां रखने से ये जल्दी असर दिखाती हैं।

15. सब कुछ ठीक होने के बाद भी आपको लगता है की हमारे हाथ में धन नहीं रुकता तो आपको अपने घर के दक्षिण-पूर्व दिशा क्षेत्र से नीला रंग हटाने की जरुरत है। इस दिशा में हल्का नारंगी, गुलाबी रंगों का प्रयोग करें।

14. घर के अंदर लगे हुए मकड़ी के जाले,धूल-गंदगी को समय-समय पर हटाने से घर में नकारात्मक ऊर्जा नहीं रहती।

13.पार्किंग हेतु उत्तर-पश्चिम का स्थान प्रयोग में लाना शुभ माना गया है।

12. घर में बनी हुई क्यारियों या गमलों में लगे हुए पौधों को नियमित रूप से पानी देना चाहिए। यदि कोई पौधा सूख जाए तो उसे तुरंत वहां से हटा देना चाहिए।

11. दक्षिण-पश्चिम दिशा में ओवरहैड वाटर टैंक की व्यवस्था करना लाभप्रद रहता है।

10. दरवाजे को खोलते तथा बंद करते समय सावधानी से बंद करें,ताकि कर्कश ध्वनि न निकले।

09. यदि आपने घर में पूजा घर बना रखा है तो शुभ फलों की प्राप्ति के लिए उसमें नियमित रूप से पूजा होनी चाहिए एवं दक्षिण-पश्चिम की दिशा में निर्मित कमरे का प्रयोग पूजा-अर्चना के लिए नहीं किया जाना चाहिए।

08. गैस का चूल्हा किचन प्लेटफार्म के आग्नेय कोण में दोनों तरफ से कुछ इंच जगह छोड़कर रखना वास्तु सम्मत माना गया है।

07. शयन कक्ष में ड्रेसिंग टेबल हमेशा उत्तर या पूर्व दिशा में रखनी चाहिए,सोते समय शीशे को ढक दें।

06. किसी भी व्यक्ति को किसी भी परिस्थिति में दक्षिण दिशा की तरफ पैर करके नहीं सोना चाहिए,ऐसा करने से बेचैनी, घबराहट और नींद में कमी हो सकती है।

05. शयन कक्ष में मुख्य द्वार की ओर पैर करके नहीं सोएं। पूर्व दिशा में सिर एवं पश्चिम दिशा में पैर करके सोने से आध्यात्मिक भावनाओं में वृद्धि होती है।

04. घर या कमरों में कैक्टस के पौधे या कंटीली झाड़ियाँ या काँटों के गुलदस्ते जो की गमलों में साज-सज्जा के लिए सजाते हैं उनसे पूरी तरह बचना चाहिए।

03. भवन में उत्तर दिशा, ईशान दिशा, पूर्व दिशा, वायव्य दिशा में हल्का सामान रखना शुभ फलदाई होता है।

02. घर में अग्नि से सम्बंधित उपकरण जहाँ तक संभव हो दक्षिण-पूर्व दिशा में रखने चाहिए।

01. घर में लगे हुए विद्युत उपकरणों का रख-रखाव उचित ढंग से होना चाहिए,उनमें से किसी भी प्रकार की आवाज़ या ध्वनि नहीं निकलनी चाहिए।

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