भारत में बहुत सारे सुरम्य राज्य और गाँव हैं और आपने शायद इतने अजीब गाँवों के बारे में सुना होगा जहाँ अजीबोगरीब प्रथाओं का भी पालन किया जाता है. लेकिन आज हम आपको एक ऐसे गाँव के बारे में बताने जा रहे हैं जिस पर आप यक़ीन नहीं करेंगे.

इसके बारे में सुनते ही आपके पैरों के नीचे की ज़मीन कांप उठी. हम जिस गाँव के बारे में आपको बताने जा रहे हैं वहाँ के हालात बेहद खराब हैं. यह गाँव हमारे देश के मध्य प्रदेश में स्थित है. जहाँ महिलाओं को पैरों की धूल माना जाता है और उन्हें काफ़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है.

वर्तमान समय में समाज में एक ओर नारी अपने कर्मों के बल पर अनेक ऊँचे पदों पर काबिज है. यह करने के लिए सभ्य बात है और इसे वहीं समाप्त होना चाहिए. मौजूदा हालात को देखते हुए यह कैसे हो सकता है जब लैंगिक समानता पर कानून हर जगह लागू है? यह एक बड़ा सवालिया निशान है.

इस प्रथा का नाम ‘धदिचा’ और इसका अर्थ है शर्मनाक कर्म करना:-मध्य प्रदेश के इस गाँव का नाम शिवपुरी है. इस गाँव में ‘धदिचा’ नाम की एक ग़लत और बहुत ही विकृत प्रथा है. ‘धदिचा’ नाम के इस गाँव में आप महिला की खूबसूरती के आधार पर 10 रुपये से लेकर 20 रुपये तक की बोली लगा सकते हैं.

जब एक महिला की बोली 20 रुपये हो और उस महिला को वह राशि देने वाला व्यक्ति एक निश्चित अवधि के लिए केवल 20 रुपये में उस महिला के साथ रह सके. जी हाँ. आपने जो सुना वह सच है.इस गाँव में एक महिला दूसरे पुरुष के साथ मात्र 20 रुपए में रहती है.

जब पुरुष का समय समाप्त हो जाता है. तो महिला स्वेच्छा से दूसरे पुरुष के साथ जाने के लिए सहमत हो जाती है. साथ ही अगर किसी पुरुष के पास बहुत पैसा है तो वह लंबे समय तक उसके साथ रह सकता है और उसके संपर्क में रह सकता है. इन महिलाओं को इस तरह के बुरे काम करने में कोई शर्म या कठिनाई नहीं होती है.

अगर कोई महिला इसका विरोध करती है तो उसे समाज से निकाल दिया जाता है. यह प्रथा कई वर्षों से इस गाँव में अंधाधुंध और व्यापक रूप से चल रही है और यही कारण है कि इस गाँव को भारत में कुख्यात गाँव के रूप में जाना जाता है. सरकार ने इस प्रथा को रोकने और समाप्त करने के लिए कई प्रयास किए हैं.

हालांकि इस गाँव में यह त्रासदी बड़ी धूमधाम से मनाई जा रही है. इसके बावजूद कहीं कोई नतीजा नहीं निकला है. इस गाँव में यह प्रथा इतनी मज़बूत है कि किसी को इससे कोई परेशानी नहीं है. लेकिन. यहाँ रहने वाली इन महिलाओं की ज़िन्दगी किसी अनिवासी से कम नहीं है. कोई विवाद नहीं है.

एक ओर जहाँ महिलाओं को स्वतंत्र आरक्षण मिला है और वे अपने तरीके से दुनिया में हैं. लेकिन. इस गाँव की महिलाओं को इन सब चीजों को छोड़कर समाज की बुराइयों का सामना करना पड़ता है. इससे ज़्यादा शर्मनाक क्या हो सकता है?

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