सरनाम सिंह ने साल 1984 में नेपाल में हुए दक्षिण एशियाई खेलों में भाला फेक में गोल्ड मेडल जीता था। सरनाम सिंह का कहना हैं कि गांवों में रहने वाले बच्चों में अंतराष्ट्रीय स्पर्धाओं में गोल्ड जीतने की योग्यता है। लेकिन उनकी प्रतिभा निखारने की सख्त जरूरत है। और अभी सरनाम सिंह गावों से ऐसे बच्चों को खोज कर उन्हें ट्रैनिंग देते है, जो आगे चलकर भारत को मेडल जीतने का जज्बा रखते है।

साल 1985 में सरनाम ने गुरुतेज सिंह के 76.74 मीटर के नेशनल रिकार्ड को तोड़ कर 78.38 मीटर भाला फेंका था। और साल 1984 में मुंबई में हुई ओपन नेशनल गेम्स में सरनाम सिंह सेकेंड आए थे। और तो और साल 1985 में जकार्ता में हुई एशियन ट्रैक एंड फील्ड प्रतिस्पर्धा में पांचवा स्थान बनाया था। और साल 1989 में दिल्ली में हुई एशियन ट्रैक एंड फील्ड प्रतिस्पर्धा में भाग लिया।

सरनाम सिंह का कहना है की उन्होंने साल 1985 में नेशनल रिकाॅर्ड बनाया और उस वक्त वो मैदान पर एक कुलपति थे। उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार के सचिव से बोला कि इस लड़के ने रिकार्ड बनाया है इसे एक हजार रुपये इनाम देना है। पर उन्होंने जीती हुई इनाम राशि आज तक नहीं दी। सरनाम ने ये भी कहा की वह भलोखरा गांव के माध्यमिक विद्यालय में लगभग दो दर्जन बच्चों को ट्रेनिंग दे रहे थे और इनमें एक किशोर 70 मीटर तक भाला फेंकता था।

सरनाम का कहना है की संसाधन मिलने पर उसका खेल और सुधर सकता था। पर हाथ पर चोट लगने की वजह से उसकी ट्रेनिंग बंद हो गई। सरनाम को किसी रंजिश की वजह से लगभग एक साल पहले गांव छोड़कर धौलपुर जाना पड़ा। और अब सरनाम गांव लौटने का इंतजार कर रहे हैं। वैसे सरनाम सिंह ने कहा कि अगर वो गांव नहीं जा सके तो वह धौलपुर के गांवों से बच्चों को ढूंढ कर भाला फेंक में ट्रेनिंग देंगे।

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