बुधिया सिंह ने 2006 में 4 साल की उम्र में पुरी से भुवनेश्वर के बीच 65 किमी की रेस पूरी करके सबको चौका दिया था। तब यह कहा जा रहा था कि वे अगले मिल्खा सिंह बनेंगे और देश के लिए एक मिशाल कायम करेंगे। लेकिन आज बुधिया कहां और क्या कर रहे हैं कोई नही जानता। लेकिन आज हम बताएंगे आपको बुधिया सिंह के बारे में।

रिपोर्ट्स के अनुसार, बुधिया सिंह अब इस खेल से बहुत दूर हो चुके है। भुवनेश्वर के भरतपुर की झुग्गियों में बुधिया की विधवा मां और दो बहनें एक छोटे से कमरे में रहती हैं। पिछले कई सालों से बुधिया को किसी ने दौड़ते हुए नहीं देखा। उनके परिवार वालो का कहना है कि सभी लाेगों ने उन्हें धोखा दिया जिससे बुधिया पूरी तरह से टूट गए।

बुधिया की बड़ी बहन रश्मि ने कहां की, ‘मेरा भाई ग्रेजुएशन करने के लिए दिल्ली में है। उसके कोच बिरंची दास से लेकर ओडिशा सरकार तक सब उसके साथ गलत तरीके से पेश आए। और इसी वजह से बुढ़िया यहां नहीं रहना चाहता था।’ उन्होंने ये भी कहां की बुधिया एक बहुत ही सफल मैराथन धावक बन सकता था लेकिन सबने उसका फायदा उठाया।

एक अच्छा घर तक नही मिला

रश्मि ने ये भी कहां की, ‘सरकार ने उसे मदद देने का वादा किया था, लेकिन उसे एक ठीक घर तक नहीं मिला। हम किराए के घर में रहते हैं।’ रश्मि और उनकी मां सुकांति एक इंजीनियरिंग कॉलेज में काम करती हैं। बुधिया मई जून में घर आया था। बुधिया ने फोन पर कहा, ‘क्या आप मेरे अतीत के बारे में बात करने की कोशिश कर रहे हैं? मैं इस बारे में अब बात नहीं करना चाहता। मैं सब भूल गया हूं।’ उसने अपनी पढ़ाई और आगे क्या करने वाला है, उसके बारे में भी बताने से मना कर दिया।

दौड़ने की सजा मिली इसी वजह से आए मैराथन में

बुधिया सिंह का जन्म 2002 में हुआ था। पिता की मौत के बाद बुधिया की मां सुकांति ने उसे एक फेरी वाले को 800 रुपए में बेच दिया था। लेकिन बाद में एक एसोसिएशन की मदद से बुधिया फिर अपने घर आ गए थे। लोकल जूडो कोच बिरंची दास ने सजा के तौर पर बुधिया को दौड़ने के लिए कहा था लेकिन जब वे 5 घंटे बाद आए तो उसे दौड़ता हुआ देख कर हैरान हो गए।

इसके बाद बुधिया ने 65 किमी की रेस पूरी करके लिम्बा बुक रिकॉर्ड्स में नाम दर्ज कराया। बुधिया 48 और मैराथन में भी उतरे।

विवादों की वजह से छोड़ दिया था साई हॉस्टल

भुवनेश्वर के साई हास्टल में बुधिया का प्रदर्शन अच्छा नहीं रह। बुधिया को स्प्रिंट के इवेंट पसंद नहीं थे और बाकी इवेंट में वो पिछड़ गए। बुधिया को हमेशा खाने की क्वालिटी और ट्रेनिंग से शिकायत रही। बाद में किसी विवाद की वजह से बुढ़िया ने हॉस्टल छोड़ दिया। ओडिशा के खेल मंत्री तुषार कांति बेहरा ने कहा था कि बुधिया के परिवार ने सरकार से सारे रिश्ते खत्म कर लिए है। उनकी मां ने आरोप लगाया कि उनके बच्चे का शोषण किया जा रहा है।

फिल्म भी बनी थी बुधिया पर

2016 में बुधिया सिंह पर एक फिल्म भी बनी थी ‘बुधिया सिंह बॉर्न टू रन’, जिसे डायरेक्ट किया था सौमेंद्र पांधी ने। इसमें मनोज बाजपेयी जैसे बड़े कलाकार ने काम किया था। इस फिल्म ने सर्वश्रेष्ठ बॉल फिल्म का पुरस्कार भी जीता था। 2018 में मैराथन रनर एलियुड किपचोगे के कोच पैट्रिक सांग ने बुधिया को ट्रेनिंग देने की बात कही थी। लेकिन ऐसा कभी हुआ नही। बुधिया के नाम पर एक ट्विटर पेज Budhiasingh_Ind भी है।

इस अकाउंट पर बुधिया के बड़े होने, दौड़ने और मैराथन में भाग लेने की फोटो हैं। इसमें उनके ओलंपिक के सपने को जिंदा रखने के लिए फंड जुटाने का लिंक भी दिया गया है। हालांकि इससे अब तक सिर्फ 44, 676 रुपए की जुटाए जा सके हैं। लक्ष्य 13 लाख रुपए का रखा गया है।

 

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