आज दुनिया में ऐसे भी लोग हैं जो प्रथाओं पर विश्वास करते हैं. कई लोगों का मानना होता है कि इन प्रथाओं से उनके परिवार के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं इस बात से कोई अनजान नहीं है. दुनिया जानती है कि आज के समय में प्रथा के नाम पर क्या-क्या किया जाता है. ऐसे में आज भी हम एक ऐसे ही गाँव के बारे में बताने जा रहे हैं जहाँ प्रथा के नाम पर बहुत कुछ ऐसा होता है जो सहना असहनीय है. चलो आज हम आपको एक ऐसी परम्परा से परिचित कराते हैं जो सदियों से चली आ रही हैं जिसे सुनकर आपका दिल दहल जाएगा. जी दरअसल में यहाँ पर मंदिर की प्रथा के अनुसार लोगों को मिर्ची पाऊडर से नहाने के बाद आग पर चलना होता है.

सदियों से चली आ रही है प्रथा

आज हम आपको सदियों से चली आ रही एक प्रथा के बारे में बताने जा रहा है.दरअसल हम बात कर रहे हैं कर्नाटक राज्य में स्थित “वर्नामुत्तु मरियम्मन मंदिर” की, जहाँ एक ऐसी परम्परा सदियों से चली आ रही हैं जिसे सुनकर आपका दिल दहल जाएगा. जी दरअसल में यहाँ पर मंदिर की प्रथा के अनुसार लोगों को मिर्ची पाऊडर से नहाने के बाद आग पर चलना होता है.

क्या होता है “चिली अभिषेक” ?

कर्नाटक राज्य में स्थित “वर्नामुत्तु मरियम्मन मंदिर” की
यह प्रथा अभी की नहीं बल्कि सदियों पुरानी है इस वजह से कई समय से इसका पालन होता आ रहा है. मान्यता के अनुसार इस परम्परा को “चिली अभिषेक” कहा जाता है इस दौरान लोगो को सबसे पहले मिर्च पाऊडर खिला देते हैं और उसके बाद उन्हें उसी से नहलाया जाता है. नहाने के बाद उन्हें आग पर चलाया जाता है. और इस परम्परा के होने के बाद सब सफल माना जाता है.

क्या होता है इस प्रथा में ?

यहां के लोगों की जानकारी के अनुसार इस मंदिर में केवल उन तीन लोगों का मिर्च स्नान होता है जो मंदिर ट्रस्ट के होते हैं. उन्हें सबसे पहले हाथ में पवित्र कंगन पहनाए जातेm हैं और पुरे दिन उपवास रखवाया जाता है. उसके बाद तीनो के बाल काटे जाते हैं और पूजा में बिठाया जाता है. पूजा के वक्त उनके शरीर पर 108 चीज़ का लेप लगाया जाता है . फिर उन्हें मिर्च से बना पाउडर खिलाया जाता है और शरीर पर मिर्च का लेप लगाते हैं. आखिर में नीम का लेप लगाकर उन्हें मंदिर लाते है और कोयले के ऊपर चलवाते हैं. जिससे की सभी की मान्यताएं पूरी हो जाए. और गांव में खुशियां ले रहती है.

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