भारत में टैलेंट की कमी नहीं है, आजकल के नौजवान ऐसे जुगाड़ लगा लेते हैं, उनके सामने बड़ी-बड़ी कंपनियां भी घुटने टेक दे ,आजकल पेट्रोल डीजल के भाव आसमान छू रहे हैं. अगर ऐसे समय पर आपकी गाड़ी दुगना माइलेज देने लगे तो आप खुशी का ठिकाना नहीं रहेगा . कौशाम्बी के विवेक कुमार पटेल ने जुगाड़ तकनीक से वो कर दिखाया है तो आइए जानते हैं कुमार का नया जुगाड़…

बचपन से ही थी कुछ करने की लगन

विवेक कुमार यूं तो एक छोटे से कस्बे कौशांबी के पिपरी पहाड़पुर निवासी हैं. आपको बता दें इनको बचपन से छोटे-मोटे जुगाड़ करने की आदत थी. वही आदत आज लोगों के लिए काफी फायदेमंद साबित हुई.12वीं पास विवेक यूं तो घरों में शटरिंग का काम करते हैं, विवेक बताते हैं कि वह पिछले दो दशक से इस कोशिश में जुटे थे कि दो पहिया वाहनों में माइलेज कैसे बढ़ाया जाए. विवेक कुमार पटेल ने अपनी इस जुगाड़ तकनीक को ‘कार्बोरेटर जेट’ का नाम दिया है.

विवेक की इस तकनीक से दो पहिया वाहन का माइलेज डबल हो गया

कौशाम्बी. 40 से 50 किलोमीटर प्रति लीटर माइलेज देने वाली आपकी बाइक अगर एक लीटर में इससे दोगुना माइलेज देने लगे तो! अगर आप इसे मजाक समझ रहे हैं तो ठहरिये. असंभव लगने वाले इस काम को संभव कर दिखाया है कौशाम्बी के विवेक कुमार पटेल ने। विवेक ने जुगाड़ तकनीक से वो कर दिखाया है जो करने के लिये कंपनियों ने ऑटोमोबाइल इंजीनियरों की फौज लगा रखी है.

उन्होंने फ्यूल इंजेक्शन सिस्टम में मामूली बदलाव कर गाड़ी का माइलेज दोगुना कर दिया है. माइलेज दोगुना होने से पेट्रोल पर आने वाला खर्च भी घटकर आधा रह जाएगा. विवेक को इंतजार है उस पल का जब ऑटोमोबाइल सेक्टर के विशेषज्ञ उसकी इस तकनीक पर मुहर लगा दें. हालांकि अंकुश ने उसके पहले ही अपने इस अविष्कार के पेटेंट के लिये आवेदन किया है.

500 वाहनों में लगा चुके हैं यह जुगाड़

उनकी इस जुगाड़ तकनीक की चर्चा हर तरफ होने लगी .उनका कहना है कि वो अब तक करीब 500 दोपहिया वाहनों में अपना बनाया कार्बोरेटर जेट फिट कर चुके हैं. जेट लगवाने वाले कई चालकों का कहना है. कि इसके लगाने के बाद उन्हें कोई दिक्कत नहीं हुई. हालांकि कुछ इंजन पर असर पड़ने की आशंका है. ऐसे में अगर ऑटोमोबाइल विशेषज्ञ इसे मंजूरी दे देते हैं तो ये आशंका भी खत्म हो जाएगी.

दरअसल दोपहिया वाहनों में फ्यूल इंजेक्शन तकनीक से इंजन में पेट्रोल जाता है और वाष्पीकृत होकर इंजन को चलाता है. विवेक बताते हैं कि इनमें जो कार्बोरेटर जेट लगे होते हैं. उसके सबसे निचले हिस्से में करीब दो एमएम का छेद होता है। इससे आधा पेट्रोल बर्बाद हो जाता है. उन्होंने इसमें बदलाव करते हुए उस छेद को बंद कर ऊपर आधे से एक एमएम के दो छेद कर दिये. इससे पेरे पेट्रोल का इस्तेमाल होता है.और माइलेज बढ़ जाता है.

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