दोस्तों भारत देश में हर धर्म और जाति के लोग रहते है,सबकी अपनी आस्था है,हिन्दू धर्म में कई मंदिर है जो की चमत्कारी माने जाते है,लोगो का मानना है कि यहाँ भगवान् खुद आकर सुचना देते है, जो भगवान् है वो कुछ भी कर सकते है,और कह सकते है,ऐसी ही एक भविष्यवादी सामने आयी है,जो हर साल की जाती है, भीतरगांव के जगन्नाथ मंदिर ने संकेत दिया है कि इस बार मानसून कमजोर होगा। 

सदियों से मंदिर दे रहा मानसून के संकेत

जानकारी के अनुसार मानसून आने के कुछ दिन पहले मंदिर के गुंबद में जड़े पत्थर से बूंदें टपकती हैं। इनके आकार से पुजारी मानसून की भविष्यवाणी करते हैं। पुजारी पं. केपी शुक्ला ने कहा कि दो दिन से छोटी बूंदें टपक रही हैं। इस बार बारिश कम होगी। पुजारी के अनुसार ये भीतरगांव के जगन्नाथ मंदिर ने संकेत दिया है ।

मानसून आने के 15-20 दिन पहले मंदिर के गुंबद से कुछ बूंदें टपकती हैं। पुजारी उनके आधार पर बताते हैं कि इस साल मानसून कैसा होगा। इस मान्यता को वैज्ञानिक आधार पर परखने के लिए देश-विदेश के वैज्ञानिकों की टीमें भी निरीक्षण कर चुकी हैं, पर बिना बारिश अंदर बूंदें टपकने का रहस्य अनसुलझा ही रहा। इस पर अब वैज्ञानिकों का कहना है कि मंदिर के डिजाइन की और गहन जांच की आवश्यकता है।

पुरातत्व विभाग के संरक्षण में मंदिर

भीतरगांव ब्लॉक के बेहटा बुजुर्ग गांव में स्थित यह मंदिर पुरातत्व विभाग के संरक्षण में है। मंदिर के पुजारी केपी शुक्ला कहते हैं मंदिरकी सेवा करते मेरी सात पीढ़ियां गुजर गईं। दो दिन से मंदिर के गुंबद से पानी टपक रहा है। इस बार बूंदे छोटी हैं, यानी कमजोर बारिश होगी।

क्या है इसका रहस्य।

 हालांकि इस रहस्य को जानने के लिए कई बार प्रयास हो चुके हैं पर तमाम सर्वेक्षणों के बाद भी मंदिर के निर्माण तथा रहस्य का सही समय पुरातत्व वैज्ञानिक पता नहीं लगा सके। बस इतना ही पता लग पाया कि मंदिर का अंतिम जीर्णोद्धार 11वीं सदी में हुआ था। उसके पहले कब और कितने जीर्णोद्धार हुए या इसका निर्माण किसने कराया जैसी जानकारियां आज भी अबूझ पहेली बनी हुई हैं ।

यह मंदिर भगवान जगन्नाथ का मंदिर है। यह मंदिर कानपुर जनपद के भीतरगांव विकासखंड मुख्यालय से तीन किलोमीटर पर बेंहटा गांव में स्थित है। ऐसा कहा जाता है कि इस मंदिर की खासियत यह है कि बरसात से 7 दिन पहले इसकी छत से बारिश की कुछ बूंदे अपने आप ही टपकने लगती हैं।

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