सरकार ने कच्चे रास्तों को पक्का करने की बहुत सी घोषणाएं की हुई हैं, सड़कों की मरम्मत के लिए प्रति वर्ष लाखों रुपये का बजट विभागों में आता है. लेकिन सड़कों की हालत को देखकर यह विकास का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है. आमतौर पर लोग परेशानी होने पर सवाल उठाते हैं, मगर समाधान के लिए हाथ नहीं बढ़ाते है. उदाहरण के लिए सड़क के गड्ढों को ही ले लीजिए. उन्हें देखकर कई लोग अपनी नाराज़गी तो जाहिर करते हैं, लेकिन उनको भरने के लिए आगे नहीं आते….

11 साल से यह बुजुर्ग दंपति सड़कों के गड्ढों को भरने का काम कर रहा है

तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद  में पिछले 11साल से बुजुर्ग दंपति दारा गड्ढों को भरने का मामला सामने आया है.
न्यूज़ एंजेंसी एएनआई से बात तरते हुए गंगाधर तिलक कटनम कहते हैं, ‘मैं भारतीय रेलवे से रिटायर होने के बाद यहां ट्रांसफर हुआ हूं. गड्ढों की वजह से आए दिन हादसे होते रहते हैं. मैंने मामले को संबंधित प्राधिकार से भी लिया, लेकिन समाधान नहीं हुआ. ऐसे में मैंने खुद से इन्हें ठीक करने का फैसला किया. मैं इस काम के लिए अपनी पेंशन के पैसे खर्च कर रहा हूं.’

तेलंगाना में एक बुजुर्ग दंपति सड़क पर आने जाने वाले लोगों की राह आसान कर रहा है. जो काम सरकार और प्रशासन को करना चाहिए वो खुद गंगाधर तिलक कटनम और उनकी पत्नी वेंकटेश्वरी कटनम कर रही हैं. ये बुजुर्ग जोड़ा पिछले 11 सालों से हैदराबाद की सड़कों के गड्ढे भर रहा है.

अब तक 2,000 से अधिक गड्ढों को भर दिया है

जीटी कटनम बताते हैं कि वह रेलवे की नौकरी से रिटायर होने के बाद वह हैदराबाद शिफ्ट हो गए. उन्होंने सड़कों पर गड्ढों के चलते कई एक्सीडेंट होते देखें, उन्होंने संबंधित प्राधिकरण से इस बात की शिकायत भी की लेकिन जब समस्या का निवारण नहीं हुआ तो उन्होंने खुद ही इसे ठीक करने में जुट जाने का फैसला किया. जीटी कटनम बताते हैं कि मैंने इसे खुद ठीक करने का फैसला किया. मैं अपनी पेंशन से पैसे का उपयोग कर रहा हूं. मैंने अब तक 2,000 से अधिक गड्ढों को भर दिया है.”

सोशल मीडिया पर कटनम और उनकी पत्नी की लोग काफी तारीफ कर रहे हैं. कई लोगों का कहना है कि समाज ऐसे लोगों की बदौलत अच्छी दिशा में जाता है. कटनम की इस मुहिम से कितने लोगों की जान बच रही है और दुर्घटनाएं टल रही हैं. लोग उन्हें सोशल मीडिया पर सैल्यूट कर रहे हैं.

जीटी कटनम की परोपकार की भावना लोगों के लिए मिसाल है. न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक वह अबतक अपनी पत्नी के साथ सड़कों के 2 हजार से अधिक गड्ढे भर चुके हैं. इस काम के लिए उन्हें कोई पैसा नहीं मिलता है बल्कि वह पैसा अपनी जेब से लगाते हैं. वह इंडियन रेलवे से रिटायर हुए हैं और अपने पेंशन के पैसे से हैदराबाद की तमाम सड़कों पर बने गड्ढे भरते हैं.

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