मोहिनी एकादशी व्रत को रखने और भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।

मोहनी एकादशी व्रत का महत्व

मोहिनी एकादशी का शास्त्रों में विशेष महत्व बताया गया है। एकादशी व्रत को सबसे कठिन व्रतों में से एक माना जाता है। कहा जाता है कि इस व्रत को रखने से सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है और दांपत्य जीवन सुखद होता है। जीवन में आने वाली समस्याओं को भी मोहिनी एकादशी व्रत में लाभकारी माना जाता है। हिंदू धर्म ग्रंथ की मान्यताओं के अनुसार इसी दिन श्रीहरि ने समुद्र मंथन के दौरान निकले अमृत को राक्षसों से बचाने के लिए मोहिनी का रूप धारण किया था I इसलिए इस दिन भगवान विष्णु के मोहिनी स्वरूप की पूजा की जाती है I ऐसी मान्यता है कि इस दिन मोहनी एकादशी का व्रत रखने से व्यक्ति के पापों का अंत होता है और व्यक्ति धीरे धीरे मोहजाल से मुक्त होकर मोक्ष की ओर अग्रसर होता है I

जानें शुभ मुहूर्त और इसकी पूजा विधि

ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक़, वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मोहिनी एकादशी कहते हैं I इस साल मोहिनी एकादशी का व्रत 23 मई को रखा जाएगा I परंतु एकादशी  तिथि प्रारम्भ: 22 मई 2021 को 09 : 15 एएम बजे से  23 मई 2021 को 06 : 42 एएम बजे तक एकादशी तिथि  समाप्त होगी। पारण का शुभ मुहूर्त : 24 मई सुबह 05: 26 बजे से सुबह 08:10 बजे तक रहेगा।

मोहिनी एकादशी व्रत की विधि

मोहिनी एकादशी का व्रत रखने का नियम व्रत वाले दिन के पहले वाली रात से ही शुरू हो जाता है I अर्थात एकादशी का व्रत दशमी की रात से शुरू होता है. इस व्रत को रखने वाले व्यक्ति को चाहिए कि वह दशमी तिथि के दिन सात्विक भोजन करें I अब एकादशी के दिन सुबह उठकर नित्यकर्म स्नानादि से निवृत होकर पूजा स्थल पर बैठकर पूजा की चौकी पर भगवान विष्णु की मूर्ति स्थापित करें I अब भगवान नारायण का विधि विधान से पूजन करें I इसके बाद विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें और मोहिनी एकादशी व्रत कथा पढ़ें I इसके बाद आरती करके क्षमा याचना करें. तत्पश्चात विसर्जन कर साष्टांग प्रणाम कर पूजा समाप्त करें इसके बाद अब दिन भर मोहिनी एकादशी व्रत के नियमों का पालन करें और अगले दिन शुभ मुहूर्त में एकादशी व्रत का पारण करें।

मोहिनी एकादशी व्रत कथा

एक समय श्रीराम बोले कि हे गुरुदेव! कोई ऐसा व्रत बताइए, जिससे समस्त पाप और दु:ख का नाश हो जाए। मैंने सीताजी के वियोग में बहुत दु:ख भोगे हैं। महर्षि वशिष्ठ बोले: हे राम! आपने बहुत सुंदर प्रश्न किया है। आपकी बुद्धि अत्यंत शुद्ध तथा पवित्र है। वैशाख मास में जो एकादशी आती है उसका नाम मोहिनी एकादशी है। इसका व्रत करने से मनुष्य सब पापों तथा दु:खों से छूटकर मोहजाल से मुक्त हो जाता है। मैं इसकी कथा कहता हूँ। ध्यानपूर्वक सुनो।

सरस्वती नदी के तट पर भद्रावती नाम की एक नगरी थी। इस नगरी में एक वैश्य रहता था।वह धन-धान्य से संपन्न ,पुण्यवान अत्यंत धर्मालु और विष्णु भक्त था। उसने नगर में लोगों के लिए अनेक पुण्य के कार्य किए। उसके 5 पुत्र थे- इनमें से पाँचवाँ पुत्र धृष्टबुद्धि महापापी था। वह वेश्या, दुराचारी मनुष्यों की संगति में रहता था।और पर-स्त्री के साथ भोग-विलास करता तथा मद्य-मांस का सेवन करता था। इसी प्रकार अनेक कुकर्मों में वह पिता के धन को नष्ट करता रहता था।

इन्हीं कारणों से त्रस्त होकर पिता ने उसे घर से निकाल दिया था। घर से बाहर निकलने के बाद वह अपने गहने एवं कपड़े बेचकर अपना निर्वाह करने लगा। जब सब कुछ नष्ट हो गया तो वेश्या और दुराचारी साथियों ने उसका साथ छोड़ दिया। अब वह भूख-प्यास से अति दु:खी रहने लगा। कोई सहारा न देख चोरी करना सीख गया। जब राजा को पता चला तो उसे नगर से निकाल दिया।

नगर से निकल जाने के बाद वह जंगल में चला गया। तथा वहां पर पशु-पक्षियों को मारकर खाने लगा। एक दिन भूख-प्यास से व्यथित होकर वह खाने की तलाश में घूमता हुआ कौण्डिन्य ऋषि के आश्रम में पहुँच गया। उस समय वैशाख मास था और ऋषि गंगा स्नान कर आ रहे थे। उनके भीगे वस्त्रों के छींटे उस पर पड़ने से उसे कुछ सद्‍बुद्धि प्राप्त हुई।वह कौण्डिन्य मुनि से हाथ जोड़कर कहने लगा कि: हे मुने! मैंने जीवन में बहुत पाप किए हैं। आप इन पापों से छूटने का कोई साधारण बिना धन का उपाय बताइए। उसके दीन वचन सुनकर मुनि ने प्रसन्न होकर कहा कि तुम वैशाख शुक्ल की मोहिनी एकादशी का व्रत करो। ऐसा करने पर तुम्हारे सारे पाप नष्ट हो जाएंगे।

मुनि के वचन सुनकर वह अत्यंत प्रसन्न हुआ और उनके द्वारा बताई गई विधि के अनुसार व्रत किया। हे राम! इस व्रत के प्रभाव से उसके सब पाप नष्ट हो गए और अंत में वह गरुड़ पर बैठकर विष्णुलोक को गया। इस व्रत से मोह आदि सब नष्ट हो जाते हैं। संसार में इस व्रत से श्रेष्ठ कोई व्रत नहीं है। इसके माहात्म्य को पढ़ने से अथवा सुनने से एक हजार गौदान का फल प्राप्त होता है।

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