कई बार लोग अपनी गरीबी का हवाला देकर अपने कदम पीछे खींच लेते हैं, लेकिन जिसके सिर पर कुछ कर गुजरने की धुन सवार होती है, वह संघर्ष से कभी विचलित नहीं होता है। वह हर परिस्थिति का सामना करते हुए आगे बढ़ते जाता है, और अंततः अपनी मंजिल तक पहुंच ही जाता है।यदि कोई यूपीएससी की परीक्षा को पहले ही प्रयास में पास कर ले तो यह मानना पड़ेगा कि उसमें कुछ तो अलग बात है।

घर बेचकर बेटे को पढ़ाया

आज हम आपको एक ऐसी कहानी बताने जा रहे हैं। जिसमें एक पिता ने अपने बेटे के सपने को पूरा करने के लिए अपना घर भी भेज दिया। आपकी जानकारी के लिए बता दे प्रदीप सिंह के पिता इंदौर में पेट्रोल पंप पर काम करते थे। उनके पिता को जब यह खबर मिली कि उनका बेटा आईएस की तैयारी करना चाहता है तो उन्होंने अपने बेटे की ललक देखकर उन्होंने ठान लिया कि वह किसी भी तरीके से उसकी तैयारी करवाएंगे।

अपने बेटे प्रदीप की पढ़ाई के लिए उन्होंने अपने प्यारे से मकान को बेच दिया। घर बेचकर जो भी पैसे जुटे उन्होंने अपने बेटे को देकर उसे दिल्ली पढ़ने के लिए भेज दिया। प्रदीप को अपने घर के हालात और आर्थिक स्थिति के बारे में अच्छे से पता था लेकिन इसके बावजूद उनके माता-पिता ने कभी भी घर की आर्थिक स्थिति को प्रदीप की पढ़ाई में बाधक नहीं बनने दिया।

यूपीएससी को अपना लक्ष्य बनाया

हमारे देश में सबसे कठिन परीक्षा यूपीएससी की परीक्षा को माना जाता है। यूपीएससी की परीक्षा पास करने के लिए खूब कड़ी मेहनत और लगन के साथ पढ़ाई करनीl पड़ती है । ऐसे में यदि कोई यूपीएससी की परीक्षा को पहले ही प्रयास में पास कर ले तो यह मानना पड़ेगा कि उसमें कुछ तो अलग बात है।

प्रदीप को अपने घर के हालात और आर्थिक स्थिति के बारे में अच्छे से पता था उन्होंने ठान लिया कि वह इतनी मेहनत करेंगे कि हर हाल में यूपीएससी की सिविल परीक्षा पास करके रहेंगे। और उन्होंने ऐसा कर दिखाया उन्होंने अपने पहले ही प्रयास में सिर्फ 22 वर्ष की उम्र में यूपीएससी में ऑल इंडिया रैंक 93वीं प्राप्त कर लिया था। प्रदीप ने इसके बाद फिर से परीक्षा दी और वे 26वीं Rank लेकर आए आईएएस अफसर के रूप में वे फिलहाल अपने पद पर कार्यरत हैं

क्या कहते हैं आईएएस प्रदीप

प्रदीप कहना है कि पोस्ट और कैडर मायने नहीं रखता है। जिस काम के लिए हमने मेहनत की है। उसके जरिए बदलाव लाना चाहते है। उन्होंने यह भी कहा जो नतीजा सामने आया है, वह दुआ और मेहनत का असर है। मेहनत मैंने की दुआ मेरे माता-पिता, परिजन और चाहने वालों ने किया है।

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