आज हम आपको एक ऐसे शख्स से परिचित कराना कराना चाहते हैं। जिन्होंने पुराने टायर और वेस्ट मटेरियल का उपयोग कर फर्नीचर बनाने का एक बहुत बड़ा बिजनेस खड़ा कर दिया। उनका कहना है कि मैं अपने बिजनेस से पर्यावरण संरक्षण के लिए भी अपना योगदान दे रहा हूँ।

छोटे से गांव से है प्रदीप

प्रदीप धुले जिले के दलवाडे गाँव के एक किसान परिवार से हैं। उनका बचपन गांव में गुजरा। उनकी दसवीं तक की पढ़ाई गांव के सरकारी स्कूल से हुई और फिर उन्होंने ITI कोर्स में दाखिला लिया। ITI करने के बाद, उन्होंने डिप्लोमा कोर्स भी किया। प्रदीप कहते हैं कि डिप्लोमा करने के बाद, उन्हें एक कंपनी में नौकरी मिल गयी।

नौकरी के साथ-साथ, वह मैकेनिकल इंजीनियरिंग करने के लिए कॉलेज में दाखिला ले लिया। साल 2016 में अपनी डिग्री पूरी करने के बाद, वह पुणे में एक मल्टीनैशनल कंपनी के साथ काम करने लगे।

आत्मनिर्भर बनना चाहते थे, प्रदीप

प्रदीप बताते हैं कि मुझे बचपन से ही अपना खुद का कोई काम करने का मन था I इसलिए अपनी नौकरी के साथ भी, मैं हमेशा बिज़नेस आईडिया खोजा करता था। और कहते हैं न कि अगर आप किसी चीज को दिल से चाहो, तो आपको सही राह दिख ही जाती है। बस इसी तरह, प्रदीप को भी उनकी सही राह दिख गई। 

नौकरी के साथ शुरू किया बिज़नेस

एक बार यूट्यूब पर पुराने टायरों और वेस्ट मटेरियल से फर्नीचर बनाने का वीडियो देखा I उनको यह काम कुछ नया लगा I तभी उन्होंने तय कर लिया था कि वह इसी क्षेत्र में आगे बढ़ेंगे, इसलिए उन्होंने अलग-अलग जंकयार्ड में जाना शुरू किया।

बाद में उन्होंने एक छोटी-सी जगह किराए पर लेकर अपना काम शुरू किया। उन्होंने खुद पुराने टायरों से फर्नीचर बनाना शुरू किया। वह कहते हैं, “मैं सुबह से शाम तक नौकरी करता था। साथ ही, अपने बिज़नेस को आगे बढ़ाने के लिए रात में काम करता था। पहले मैं कुर्सी और मेज डिज़ाइन करता था, जिसमें मेरे कुछ दोस्त भी कई बार आकर मेरी मदद कर देते थे।” 

वह बताते हैं कि 2019 में उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ दी, क्योंकि तब तक वह अपने बिज़नेस से उतना ही कमाने लगे थे, जितनी उनकी सैलरी थी। अब तक वह छोटे-बड़े लगभग 500 ऑर्डर पूरे कर चुके हैं। उन्होंने पुणे, मुंबई, हैदराबाद, बेंगलुरु जैसे शहरों में भी कई बड़े प्रोजेक्ट किए हैं। उन्होंने कहीं पर किसी के घर का डेकॉर किया है, तो कहीं कैफ़े के लिए

लगभग 500 टन कचरे का किया प्रबंधन

प्रदीप कहते हैं कि शुरुआत उन्होंने बेकार और पुराने टायरों से की थी, लेकिन आज वह इंडस्ट्रियल बैरल, पुरानी और बेकार कार, ऑटो रिक्शा, बाइक, साइकिल, पुरानी लकड़ी आदि को अपसायकल करके, मेज, कुर्सी, सोफा, वॉश बेसिन, फ़ूड कार्ट, बैरल वाइन स्टोरेज, हैंगिंग लाइट्स जैसी चीजें बना रहे हैं। उन्होंने अब तक एक लाख से ज्यादा बैरल, 50 हजार से ज्यादा टायरों और पांच हजार से ज्यादा वाहनों को अपसायकल किया है। 

उनका कहना है कि अगर सभी तरह के कचरे की बात करें, तो वह लगभग 500 टन कचरे का प्रबंधन कर चुके हैं। साथ ही, अपने इस बिज़नेस से उनकी कमाई लाखों में है। अंत में वह कहते हैं, “शुरुआत में चीजें बहुत मुश्किल थी, क्योंकि मैं भी इस काम में नया था, लेकिन पीछे हटने की बजाय, मैंने दिन-रात मेहनत की और इस बिज़नेस में सफलता हासिल की।

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