किसी ने ठीक ही कहा है कि “एक पिता का अभिमान होती है बेटियां” …हम आए दिन ऐसी खबरें सुनते रहते हैं, जिसमें देश की प्रतिभाषाली बेटियों ने ना सिर्फ़ उनके परिवार का बल्कि सारे देश का नाम रोशन किया है। इसी वज़ह से बेटियों को पिता का अभिमान कहा जाता है ।

देश की ऐसी बहुत सी बेटियां हैं, जिन्होंने न सिर्फ अपना बल्कि अपने परिवार या यूं कहें की पूरे देश का नाम रोशन किया है। ऐसी ही एक बेटी की कहानी आज हम आपको सुनाने जा रहे हैं। हम बात कर रहे हैं 2018 बैच की IAS आफिसर साक्षी की। जिन्होंने ख़ूब मेहनत से पढ़ाई की और आईएएस अधिकारी बनकर अपने पिता के सपने को साकार किया।

पिताजी का सपना भी था IAS  बनना

साक्षी ने ख़ूब मेहनत से पढ़ाई की और आईएएस अधिकारी बनकर अपने पिता के सपने को साकार किया। उनके पिताजी का नाम कृष्ण कुमार गर्ग है और वे एक बिजनेसमैन हैं। साक्षी कहती हैं कि उनके पिता जी IAS बनना चाहते थे, परन्तु कुछ कारणों से उनकी यह इच्छा पूरी नहीं हो सकी। इसीलिए उन्होंने हमेशा से ही साक्षी यूपीएससी एग्जाम के लिए हौसला दिया और साक्षी ने अपने और अपने पिता कै अधूरे सपने को उनकी बेटी ने साकार कर दिखाया ।

साक्षी  शुरुआत से ही पढ़ने में वे होशियार रहा करती थीं। उन्होंने ग्रेजुएशन तक तो राबर्ट्सगंज रहकर ही शिक्षा प्राप्त की है। साक्षी पढ़ने में काफ़ी अच्छी थीं, उन्होंने 10 वीं की परीक्षा में 76 प्रतिशत तथा 12वीं में 81.4 प्रतिशत नम्बर प्राप्त किए थे। फिर राजकीय महिला महाविद्यालय से इन्होंने B.A की पढ़ाई पूरी की।

12वीं में ही बनाया सपना आई ए एस एग्जाम क्रैक करना है 

12 वीं की परीक्षा देने के पश्चात साक्षी ने तय कर लिया था कि उन्हें यूपीएससी की तैयारी करनी है। दरअसल 12 वीं की परीक्षा देने के पश्चात ही साक्षी ने ठान लिया था कि वे एक अधिकारी बनेंगी मगर उत्तर प्रदेश में उन्हें अच्छी गाइडेंस देने वाला कोई नहीं मिला इसीलिए वह तैयारी करने दिल्ली जाना चाहती थी. इसीलिए साक्षी ने तय किया कि वह अपने ग्रेजुएशन पूरी होने के बाद ही यूपीएससी की तैयारी शुरू करेंगी.

साक्षी बताती हैं कि ग्रेजुएशन पूरी करने के बाद उन्होंने निश्चय किया कि वे दिल्ली जाकर यूपीएससी की परीक्षा की तैयारी करेंगी। जब उन्होंने इस बारे में अपने पिता जी से कहा कि वे दिल्ली जाकर पढ़ना जाती है और यूपीएससी की परीक्षा देकर आईएएस ऑफिसर बनना चाहती है तो उनके पिताजी बहुत खुश है क्योंकि वे स्वयं आईएएस ऑफिसर बनने का सपना देखते थे। साक्षी के पिता जी ने उनका बहुत साथ दिया।

साक्षी ने ख़ूब मेहनत से पढ़ाई की और आईएएस अधिकारी बनकर अपने पिता के सपने को साकार किया।

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