भारत का एक ऐसा गांव जहां पर आज भी अपनी परेशानियों को दूर करने के लिए मन में श्रद्धा लेकर यहां पर पहुंचते हैं. अगर आप भी भगवान पर विश्वास रखते हैं. और आप चाहते हैं आपकी हर इच्छा पूरी हो तो आपको इस गांव में अवश्य जाना चाहिए. यहां पर जाने से आपकी हर इच्छा जरूर पूरी होगी. कहा जाता है कि जो भी व्यक्ति पूरे मन और श्रद्धा से यहां पर आता है. उसके मन की हर इच्छा पूरी होती है.

भारत के उत्तराखंड में स्थित है गांव जहां पर लोग अपने दुख दर्द के साथ यहां पर आते हैं. और यहां आने से उनकी सारी मनोकामनाएं पूर्ण होती है. इस गांव को भारत का आखिरी गांव’ या ‘उत्तराखंड का आखिरी गांव’ कहा जाता है। यह गांव पवित्र बद्रीनाथ से चार किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, जो चीन की सीमा से लगा हुआ है. कहते हैं कि इस गांव को भगवान शिव का विशेष आशीर्वाद मिला हुआ है कि जो भी यहां आएगा, उसकी गरीबी दूर हो जाएगी.ये एक बड़ी वजह है कि यहां हर साल बड़ी संख्या में लोग घूमने के लिए आते हैं.

इस गांव का रिश्ता महाभारत काल से भी जुड़ा हुआ है और भगवान गणेश से भी. मान्यता है कि इस गांव से होकर ही पांडव स्वर्ग गए थे। आज हम आपको इस गांव से जुड़े कई रहस्यमय और रोचक बातें बताएंगे, जो आपको हैरान कर देंगी.माणा नामक यह गांव करीब 19 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित है। कहते हैं कि इस गांव का नाम मणिभद्र देव के नाम पर ‘माणा’ पड़ा था। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, यह भारत का एकमात्र ऐसा गांव है, जो धरती पर मौजूद चारों धामों में भी सबसे पवित्र माना जाता है। इस गांव को शापमुक्त और पापमुक्त भी माना जाता है.

पौराणिक कथा

शाह नाम एक व्यापारी था जो शिव का बहुत बड़ा भक्त था. एक बार व्यापारिक यात्रा के दौरान लुटेरों ने उसका सिर काटकर कत्ल कर दिया। लेकिन इसके बाद भी उसकी गर्दन शिव का जाप कर रही थी। उसकी श्रद्धा से प्रसन्न होकर शिव ने उसके गर्दन पर वराह का सिर लगा दिया। इसके बाद माना गांव में मणिभद्र की पूजा की जाने लगी। शिव ने माणिक शाह को वरदान दिया कि माणा आने पर व्यक्ति की दरिद्रता दूर हो जाएगी.

गांव में है स्वर्ग जाने का रास्ता

माणा में महाभारत काल का बना हुआ एक पुल आज भी मौजूद है, जिसे ‘भीम पुल’ के नाम से जाना जाता है.लोगों का मानना है कि जब पांडव इस गांव से होते हुए स्वर्ग जा रहे थे, तो उन्होंने यहां मौजूद सरस्वती नदी से आगे जाने का रास्ता मांगा था, लेकिन सरस्वती नदी ने मार्ग देने से मना कर दिया, जिसके बाद महाबली भीम ने दो बड़ी-बड़ी चट्टानों को उठाकर नदी के ऊपर रख दिया था और अपने लिए रास्ता बनाया था। इसके बाद इस पुल को पार करके पांडवों ने स्वर्ग के लिए प्रस्थान किया था.

लक्ष्‍मी भर देती हैं धन-धान्‍य से घर

इस गांव में व्यास गुफा भी है, जिसके बारे में मान्यता है कि यहां महर्षि वेदव्यास रहा करते थे। यहीं पर उन्होंने कई वेद और पुराणों की रचना की थी। व्यास गुफा की ऊपरी संरचना को देखकर ऐसा लगता है जैसे ग्रंथ के कई पन्नों को एक के ऊपर एक रखा गया है। इसी वजह से इसे ‘व्यास पोथी’ भी कहा जाता है. यहां पर हर साल लाखों श्रद्धालु आते हैं. और अपने दुख दर्द को मिटा कर लौटता है. कहा जाता है यहां से कोई श्रद्धालु उदास होकर नहीं गया.

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