धर्म ग्रंथों के अनुसार जो लोग चार धाम के दर्शन करने में सफल होते हैं, उनके न केवल इस जन्म के पाप नष्ट हो जाते हैं, बल्कि वे जीवन-मृत्यु के बंधन से भी मुक्‍त हो जाते हैं I

चार धाम का विशेष महत्व

हिन्दू धर्म में चार धाम का विशेष महत्व है | इन चारों धामों को बहुत ही पवित्र और मोक्ष प्रदान करने वाला बताया गया है | ऐसी मान्यता है के जो हिन्दू इन चारधाम की यात्रा करता है वह जीवन-मृत्यु के बंधन से छुट जाता है और उसे अंत में मुक्ति प्राप्त होती है |

क्या है पौराणिक कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार पीड़ित मानवता को बचाने के लिए जब देवी गंगा ने पृथ्‍वी पर आना स्‍वीकार किया तो हलचल मच गई, क्‍योंकि पृथ्‍वी, गंगा के प्रवाह को सहन करने में असमर्थ थी I फलस्वरूप गंगा ने खुद को 12 भागों में विभाजित कर लिया I इन्‍हीं में से अलकनंदा भी एक हैं, जो बाद में भगवान विष्‍णु का निवास स्‍थान बनीं I

हिंदू मान्यताओं के अनुसार इन तीर्थस्थलों के दर्शन से व्यक्ति के समस्त पाप कट जाते हैं तथा मृत्योपरांत मोक्ष की प्राप्ति होती है।चारों धाम देश की चार दिशाओं में उत्तर में बद्रीनाथ, दक्षिण में रामेश्वर, पूर्व में पुरी और पश्चिम में द्वारिका के नाम से प्रसिद्ध हैं।

उत्तर में बद्रीनाथ धाम

हिमालय की गोद में बसे चार धाम में बद्रीनाथ का सबसे‍ अधिक महत्‍व है,यह तीर्थ भगवान विष्णु को समर्पित है।बद्रीनाथ धाम में नारायण की पूजा होती है। यहां एक अखण्ड दीप जलता रहता है, जो कि अचल ज्ञानज्योति का प्रतीक है। यहां वनतुलसी की माला, चने की कच्ची दाल, गिरी का गोला और मिश्री आदि का प्रसाद चढ़ाया जाता है।

बद्रीनाथ मंदिर के कपाट अप्रैल के आखिरी या मई के शुरुआती दिनों में दर्शन के लिए खोल दिए जाते हैं। लगभग 6 महीने तक पूजा के बाद नवंबर के दूसरे सप्ताह में मंदिर के पट फिर से बंद कर दिए जाते हैं।

दक्षिण में रामेश्वर धाम

रामेश्वर धाम में भगवान शिव की पूजा शिवलिंग रूप में की जाती है। इस शिवलिंग को द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक माना जाता है।माना जाता है कि भगवान राम ने ही इस रामेश्वरम् शिवलिंग की स्थापना की थी I दक्षिण में रामेश्वरम की वही मान्यता है जो उत्तर में काशी की है।

रामेश्वर तीर्थ तमिलनाडु के रामनाथपुरम जिले में समुद्र के किनारे स्थित है। यह हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी से चारों ओर से घिरा हुआ एक सुंदर शंख आकार द्वीप है।

पूर्व में पुरी धाम

यह धाम भगवान विष्णु के अवतार कृष्ण को समर्पित है। यह वैष्णव सम्प्रदाय का मंदिर है यहां उनकी जगन्नाथ के रूप में पूजा की जाती है। इस मंदिर का वार्षिक रथ यात्रा उत्सव प्रसिद्ध है। यहां मुख्य रूप से भात का प्रसाद चढ़ाया जाता है।

भारत के ओडिशा राज्य में समुद्र के तट पर बसे चार धामों में से एक जगन्नाथपुरी की छटा अद्भुत है। इसे सात पवित्र पुरियों में भी शामिल किया गया है।

पश्चिमी में द्वारिका धाम

द्वारिका धाम भगवान कृष्ण द्वारा बसाई गई थी। कहा जाता है कि असली द्वारिका तो पानी में समा चुकी है, परन्तु इस भूमि पर भगवान श्रीकृष्ण के चरण पड़ने के कारण इसे आज भी पवित्र माना जाता है। इसलिए द्वारका धाम में श्रीकृष्ण स्वरूप का पूजन किया जाता है।

यह गुजरात के पश्चिमी सिरे पर समुद्र के किनारे बसी द्वारिका पुरी को चार धामों में से एक माना गया है। ये तीर्थ पुराणों में बताई गई मोक्ष देने वाली सात पुरियों में से एक है।

जो मनुष्य इन चारधाम की यात्रा कर लेता है ,वह जीवन-मृत्यु के बंधन से छुट जाता है और इन चार धामों की यात्रा के दौरान मार्ग में देश के सभी प्रमुख तीर्थ स्थल पड़ते हैं जिससे उन सभी के दर्शन भी हो ही जाते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *