दिल्ली की हवा अब सांस लेने लायक नहीं रह गई है। पहले तो यहां की हवा में प्रदूषण था ही लेकिन दीपावली के  बाद आने वाले त्योहारों ने प्रदूषण का स्तर चरम पर पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है। पिछले 22 दिनों से नोएडा और ग्रेटर नोएडा के लोगों को सांस लेने लायक हवा नसीब नहीं हुई। इससे पहले 26 अक्तूबर को दोनों शहरों का एक्यूआई मध्यम श्रेणी में था। यानि इन स्थानों पर एक्यूआई 200 से कम दर्ज किया गया था। इसके बाद से खराब, बेहद खराब और गंभीर श्रेणी में दोनों शहरों की हवा दर्ज की गई। जिससे सांस के मरीजों के साथ ही नेत्र रोगी भी बढ़े।

नोएडा और ग्रेटर नोएडा का AQI का लेवल बुधवार को 356 और 362 दर्ज किया गया है। बात यदि बीते तीन सप्ताह से अधिक की करें तो दोनों ही जगहों की हवाएं जहरीली हो चुकी हैं। इससे पहले की AQI लेवल की यदि बात की जाए तो इसका लेवल 154 और 149 दर्ज किया था। बताया जा रहा है कि दीपावली के बाद से दिल्ली की हवा और भी जहरीली हो चुकी है।

नियमों के बाद भी लोगों ने जमकर आतिशबाजी की। जिसका नतीजा ये निकला कि अब जहरीली हवा में लोग सांस लेने के लिए मजबूर है। इस हवा से सबसे ज्यादा परेशानी बच्चों को होने वाली है। क्योंकि बच्चों पर जहरीली हवा का सबसे बुरा असर होगा। बच्चों को सांस सी जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं।

12 नवंबर को नोएडा में इस सीजन का सबसे ज्यादा वायु प्रदूषण दर्ज किया गया। इस दिन शहर का AQI 488 दर्ज किया गया। वहीं ग्रेटर नोएडा का AQI 478 रहा। इसके बाद नोएडा दो दिन देश का सबसे वायु प्रदूषित शहरों में शुमार रहा। सबसे बड़ी परेशानी यह रही कि पीएम 2.5 का स्तर पीएम 10 के स्तर से ज्यादा रहा।

आने वाले दिनों में भी वायु प्रदूषण बेहद खराब और गंभीर श्रेणी में रहने की आशंका है। लिहाजा वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड लगातार एहतियात और सख्ती से संबंधित दिशा-निर्देश जारी कर रहा है।

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