आज हम आपको एक ऐसी कहानी बताने जा रहे हैं।
जिसमें एक गरीब मां ने दूसरों के घरों में सफाई का काम करके अपने परिवार को संभालने के साथ-साथ अपनी बेटी के डॉक्टर बनने के सपने को भी साकार कर दिया।

किस तरह सुनीता ने संघर्ष किया ?

यह कहानी सुमित्रा नाम की एक महिला की है। जो यूपी के हमीरपुर जिले के मौदहा कस्बे की रहने वाली हैं I सुमित्रा ने बताया उनके पांच बच्चे हैं I सुमित्रा बताती है कि परिवार की आर्थिक स्थिति बिल्कुल ठीक नहीं थी वहीं करीब 14 साल पहले उनके पति की मौत बीमारी की वजह से हो गई थी ऐसे में पूरे परिवार की जिम्मेदारी सुमित्रा पर आ गई थी I सुमित्रा ने बताया मैं ज्यादा पढ़ी-लिखी नहीं हूं, लेकिन गरीबी बच्चों की पढ़ाई के बीच में नहीं आने देना चाहती थी I

सुमित्रा बताती है कि उनकी बड़ी बेटी। बड़ी अनीता पढ़ाई में बेहद होशियार हैं और डॉक्टर बनना चाहती है मैं जानती थी कि डॉक्टर- इंजीनियर बड़े घर के बच्चे बनते हैं, गरीब परिवार के नहीं लेकिन ये भी जानती थी कि दुनिया में कोई काम नामुमकीन नहीं है और एक मां होने के नाते मेरा फर्ज बनता है कि मैं अपने बच्चों का हर सपना पूरा करने में उनकी मदद करूं

सुमित्रा बताती है कि मैंने अपना सारा जीवन गरीबी में बिता दिया, लेकिन गरीबी के कारण अपने बच्चों के सपनों को टूटता नहीं देख सकती थी I जिसके बाद मैंने अपनी बेटी का डॉक्टर बनने का सपना पूरा किया बेटी को डॉक्टर बनाने के लिए सुमित्रा ने मां की सभी जिम्मेदारी निभाई I उन्होंने घरों में झाड़ू-पोछा करने का काम शुरू कर दिया I बस स्टैंड पर पानी बेचा I वही जब इन सब काम से ज्यादा पैसे नहीं आने लगे तो तो सब्जी की दुकान लगाना शुरू कर दिया I

आखिरकार सुमित्रा की मेहनत रंग लाई

सुमित्रा ने अपनी बेटी के लिए जितनी मेहनत की थी वह रंग लाई I साल 2013 में कानपुर में एक साल की तैयारी के बाद सीपीएमटी में अनीता का सलेक्शन हो गया I उसने 682 रैंक हासिल की थी I जिसके बाद उसे इटावा के सैफई मेडिकल कॉलेज में एडमिशन मिल गया I आपको बता दें, अनीता का एमबीबीएस की पढ़ाई करते हुए पांचवा आखिरी साल है I अनीता ने बताया जब मेरा सलेक्शन हुआ तब मां बहुत रोई थी I जिसे देख मुझे भी रोना आ गया था I

वहीं अनीता ने कहा मां ने मुझे डॉक्टर बनाने के लिए काफी मेहनत की है I वहीं मेरे पिता की मौत भी बीमारी की वजह से हुई थी और उस वक्त इलाज के पैसे नहीं थे I मैंने गरीबी देखी है इसलिए भविष्य में उन लोगों के लिए मुफ्त इलाज करूंगी जो गरीब होने की वजह से अस्पताल नहीं पहूंच पाते। ये कहना सही है एक मां है जो अपने बच्चों के लिए वो सब कर सकती हैं जो लोगों को नामुमकीन लगता है I किसी ने सही कहा है “मां की दुआओं में बहुत दम है” I

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