हमारे पौराणिक हिन्दू धार्मिक ग्रंथों के अनुसार हमारे 33 करोड़ देवी देवताओ व 38 करोड़ ऋषि मुनियों का वास होता है हम हिन्दू इनकी पूजा अर्चना करते हैं । हिन्दू धार्मिक मान्यता अनुसार भगवान शिव त्रिदेवो में एक है व भगवान शिव की यह यात्रा बहुत ही पावन है।यह यात्रा अमरत्व से भरी हुई यात्रा है ।कहा जाता है कि इस यात्रा को पूरा करने वाले व्यक्ति को अमरत्व प्राप्त होता हैं।इसलिए यह यात्रा हिन्दू धर्म में बहुत ही पवित्र माना गया है ।यह कहना बहुत ग़लत होगा कि अमरनाथ यात्रा के अंश राजाओं के काल व बौद्ध काल आदि में नहीं पाते गये है अमरनाथ यात्रा यात्रा के अंश पुरातन काल में भी पाये गये है।

आइए आज हम जानते हैं अमरनाथ यात्रा से जुड़े कुछ रोचक तथ्यों के विषय में ।

अमरनाथ गुफा को पुरातत्व विभाग वाले 5 हजार वर्ष पुराना मानते हैं अर्थात महाभारत काल में यह गुफा थी। लेकिन उनका यह आकलन गलत हो सकता है, क्योंकि सवाल यह उठता है कि जब 5 हजार वर्ष पूर्व गुफा थी तो उसके पूर्व क्या गुफा नहीं थी? हिमालय के प्राचीन पहाड़ों को लाखों वर्ष पुराना माना जाता है। उनमें कोई गुफा बनाई गई होगी तो वह हिमयुग के दौरान ही बनाई गई होगी अर्थात आज से 12 से 15 हजार वर्ष पूर्व।


बौद्धकाल के बाद ईसा पूर्व लिखी गई कल्हण की ‘राजतरंगिनी तरंग द्वितीय’ में उल्लेख मिलता है कि कश्मीर के राजा सामदीमत (34 ईपू-17वीं ईस्वीं) शिव के भक्त थे और वे पहलगाम के वनों में स्थित बर्फ के शिवलिंग की पूजा करने जाते थे। इस उल्लेख से पता चलता है कि यह तीर्थ यात्रा करने का प्रचलन कितना पुराना है।

बृंगेश संहिता, नीलमत पुराण, कल्हण की राजतरंगिनी आदि में अमरनाथ तीर्थ का बराबर उल्लेख मिलता है। बृंगेश संहिता में कुछ महत्वपूर्ण स्थानों का उल्लेख है, जहां तीर्थयात्रियों को अमरनाथ गुफा की ओर जाते समय धार्मिक अनुष्ठान करने पड़ते थे। उनमें अनंतनया (अनंतनाग), माच भवन (मट्टन), गणेशबल (गणेशपुर), मामलेश्वर (मामल), चंदनवाड़ी (2,811 मीटर), सुशरामनगर (शेषनाग, 3454 मीटर), पंचतरंगिनी (पंचतरणी, 3,845 मीटर) और अमरावती शामिल हैं।

अमरनाथ गुफा, भगवान शिव के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है. इसलिए अमरनाथ को तीर्थों का तीर्थ कहा जाता है. हर साल दुनिया भर से हजारों श्रद्धालु भगवान् शिव के दर्शन करने आते हैं. इस गुफा में 10-12 फीट ऊंचा प्राक्रतिक शिवलिंग बनता है. ऐसा माना जाता है कि इस शिवलिंग के दर्शन करने से भगवान् शिव की विशेष कृपा मिलती है.

क्या आप जानते हैं कि अमरनाथ गुफा दक्षिण कश्मीर के हिमालयवर्ती क्षेत्र में है. यह श्रीनगर से लगभग 141 किमी. की दूरी पर 3,888 मीटर (12,756 फुट) की उंचाई पर स्थित है. इस तीर्थ स्थल पर पहलगाम और बालटाल मार्गों से पहुंचा जा सकता है. श्रीनगर से पहलगाम करीब 92 किलोमीटर और बालटाल करीब 93 किलोमीटर दूर है. पहलगाम या बालटाल पहुंचने के बाद आगे की यात्रा पैदल या घोड़े-खच्चर की मदद से करनी होती है।

अमरनाथ गुफा से जुड़ी कई रोचक कहानियां हैं।उनमें से कुछ दिलचस्प और कुछ आकर्षक भी हैं. आइये इस लेख के माध्यम से अमरनाथ गुफा के बारे में 10 रोचक तथ्यों पर अध्ययन करते हैं.

10 रोचक तथ्य अमरनाथ यात्रा के बारे में

10. अमरनाथ गुफ़ा की लंबाई (भीतर की ओर गहराई) 19 मीटर और चौड़ाई 16 मीटर है. यह गुफ़ा लगभग 150 फीट क्षेत्र में फैली हुई है और लगभग 11 मीटर ऊंची है. इस गुफा का महत्व प्राक्रतिक शिवलिंग के निर्माण से नहीं बल्कि यहां भगवान शिव ने देवी पार्वती को अमरत्व की कहानी सुनाई थी. इसलिए ऐसी मान्यता है कि भगवान शिव साक्षात अमरनाथ गुफा में विराजमान रहते हैं. इस गुफा में स्थित पार्वती पीठ 51 शक्तिपीठों में से एक है और ऐसी मान्यता है कि यहां भगवती सती का कंठ भाग भी गिरा था.

9. क्या आप जानते हैं कि कश्मीर में 45 शिव धाम, 60 विष्णु धाम, 3 ब्रह्मा धाम, 22 शक्ति धाम, 700 नाग धाम तथा असंख्य तीर्थ हैं पर अमरनाथ धाम का सबसे अधिक महत्व है. पुराण के अनुसार काशी में लिंग दर्शन और पूजन से दस गुना, प्रयाग से सौ गुना और नैमिषारण्य से हज़ार गुना पुण्य देने वाले अमरनाथ के दर्शन माने जाते है. यहां तक कि बृंगेश सहिंता, नीलमत पुराण, कल्हण की राजतरंगिनी आदि में इस का बराबर उल्लेख मिलता है. कल्हण की ‘राजतरंगिनी’ में कश्मीर के शासक सामदीमत का एक आख्यान है. वह शिव का एक बड़ा भक्त था जो वनों में बर्फ़ के शिवलिंग की पूजा किया करता था. हम आपको बता दें कि बर्फ़ का शिवलिंग कश्मीर को छोड़कर विश्व में कहीं भी नहीं मिलता है.

8. अमरनाथ गुफा का इतिहास
ऐसा माना जाता है कि इस गुफा की खोज बुट्टा मलिक नामक एक गडरिये ने की थी. वह एक दिन भेड़ें चराते-चराते बहुत दूर निकल गया. एक जंगल में पहुंचकर उसकी एक साधू से भेंट हो गई. साधू ने बुट्टा मलिक को कोयले से भरा एक थैला दिया. जब वह घर पहुंचा तो उसने कोयले की जगह उस थैले में सोना पाया तो वह बहुत हैरान हो गया. कोयले सोना बन गए थे. यह चमत्कार देखकर चरवाहा आश्चर्यचकित हो गया और साधू को खोजने के लिए पुन: उसी स्थान पर पहुंच गया. साधू को खोजते-खोजते उसको अमरनाथ की गुफा दिखाई दी परन्तु साधू नहीं मिला. उसी दिन से यह स्थान एक तीर्थ बन गया.

7. अमरनाथ गुफा की कथा

शास्त्रों के अनुसार इसी गुफा में भगवान शिव ने माता पार्वती को अमरत्व की कहानी सुनाकर इसका रहस्य बताया था. परन्तु अमरकथा सुनाने के लिए समस्या यह थी कि कोई अन्य जीव इस कथा को न सुने. इसलिए भगवान शिव ने पांच तत्वों (पृथ्वी, जल, वायु, आकाश और अग्रि) का परित्याग करके इन पर्वत मालाओं में पहुंच गए और अमरनाथ गुफा में पार्वती को अमरकथा सुनाई. पार्वती के साथ इस रहस्य को शुक (कबूतर) ने भी सुन लिया था. यह शुक बाद में शुकदेव ऋषि के रूप में अमर हो गए. आइये अमरनाथ यात्रा के बारे में अध्ययन करते हैं की कैसे भगवान शिव अमरनाथ गुफा तक पहुंचे थे.

6. पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान शिव ने गुफा तक पहुंचने के लिए पहलगाम मार्ग लिया था.


पहलगाम-जब भगवान शिव अमृत कथा को सुनाने के लिए पार्वती को गुफा ले जा रहे थे, तो उन्होंने पहले इस स्थान पर अपना वाहान, नंदी को इस जगह पर छोड़ दिया था. इसलिए इस जगह को पहलगाम कहा जाता है. यह श्रीनगर से 96 किलोमीटर दूर है और पहाड़ीयों की चोटियों से घिरा हुआ है.

चंदनबाड़ी- पहलगाम के बाद अगला स्थान चंदनबाड़ी है. यह पहलगाम से 16 किलोमीटर दूर है. विश्वासों के अनुसार, भगवान शिव ने यहां एक बहुत ही अनोखी चीज को किया. इस जगह को चंद्रामौली के रूप में भी जाना जाता है क्योंकि भगवान शिव ने यहां अपने सिर से चंद्रमा का परित्याग किया था. चंद्रमा ने फिर यहां लौटने के लिए भगवान शिव का इंतजार किया था. इस प्रकार इस जगह का नाम चंदनबाड़ी पड़ा.

5. पिस्सू टॉप

चंदनबाड़ी से थोड़ा आगे पिस्सू टॉप है. इस जगह का महत्व अमरनाथ के दर्शन से संबंधित है. इसके अनुसार, अमरनाथ के दर्शन के लिए, देवताओं और राक्षसों के बीच एक बड़ी लड़ाई हुई थी. उस समय भगवान शिव की सहायता से, देवों ने राक्षसों को हरा दिया था. राक्षसों के मृत शरीर के साथ एक पहाड़ का गठन किया गया था. तब से इस जगह को पिस्सू टॉप के नाम से जाना जाता है.

शेषनाग- पिस्सू टॉप के बाद अगला गंतव्य शशनाग है. भगवान शिव ने यहां अपनी गर्दन से सर्प को रखा था. यहां नीले पानी की एक झील है, जो साबित करती है कि यह शशनाग का स्थान है. यह चंदनवाडी से 12 किलोमीटर दूर है.

4. महागुन माउंटेन या महागुणस पर्वत
यह जगह शशनाग से लगभग 4 से 5 किलोमीटर दूर है. यह 14,000 फीट की ऊंचाई पर है. ऐसा माना जाता है कि भगवान शिव ने अपने प्रिय पुत्र गणेश को यहां छोड़ दिया था. इस जगह में कई झरने और सुंदर द्रश्य हैं.

पंचतरणी- यह महागुन माउंटेन से 6 किलोमीटर दूर है. यह 12,500 फीट की ऊंचाई पर है. ऐसा माना जाता है कि भगवान शंकर ने यहां पांच पंचभट्टों का त्याग किया था यानी पृथ्वी, जल, वायु, आकाश और अग्रि. यहां पांच नदियों का संगम है. ऐसा माना जाता है कि यहां पांच नदियां बहती हैं जो भगवान शिव की जटाओं से निकलती हैं.

3. अमरनाथ गुफा


यह यात्रा का अंतिम गंतव्य है. अमरनाथ गुफा 13,500 फीट की ऊंचाई पर स्थित है. गुफा के लिए 3 किलोमीटर का मार्ग बर्फ से ढका हुआ है. बर्फ की नदी पार करने के बाद, गुफा को अंततः देखा जा सकता है. गुफा लगभग 100 फीट लंबी और 150 फीट चौड़ी है. इसी गुफा में प्राक्रतिक बर्फ से बना हुआ शिवलिंग का निर्माण होता है. इसी में भगवान शिव ने माता पार्वती को अमरत्व के रहस्य को बताया था.

2. सबसे आश्चर्य की बात यह है कि अमरनाथ शिवलिंग की ऊंचाई चंद्रमा के घटने-बढ़ने के साथ-साथ घटती-बढ़ती रहती है. पूर्णिमा के दिन शिवलिंग अपने पूरे आकार में होता है, जबकि अमावस्या के दिन शिवलिंग का आकार कुछ छोटा हो जाता है. यहां स्थित शिवलिंग पर लगातार बर्फ की बूंदें टपकती रहती हैं, जिससे लगभग 10-12 फीट ऊंचा शिवलिंग निर्मित हो जाता है. यह गुफा हिमालय पर्वत पर करीब 4000 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है. यहां चारों ओर बर्फीली पहाड़ियां दिखाई देती हैं.

1 अमरनाथ गुफा में शिवलिंग के साथ ही श्रीगणेश, पार्वती और भैरव के हिमखंड भी निर्मित होते हैं. हर वर्ष आषाढ़ पूर्णिमा से रक्षाबंधन और सावन के पूरे माह यहां श्रद्धालु बाबा अमरनाथ के दर्शन के लिए पहुंचते हैं. किंवदंती के अनुसार रक्षा बंधन की पूर्णिमा के दिन भगवान शंकर स्वयं अमरनाथ गुफा में पधारते हैं.

तो ये थे अमरनाथ गुफा और अमरनाथ यात्रा से जुड़े 10 रोचक तथ्य जिसका अध्ययन करके आपको पता चल गया होगा कि अमरनाथ यात्रा कैसे की जाती है और अमरनाथ गुफा की कथा क्या है.

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