पंजाब से कनाडा जाने वाले छात्रों की जिंदगी इतनी आसान नहीं होती है। केनेडा के एक शिक्षक ने अपने स्टूडेंट्स की तस्वीरें सोशल मीडिया पर अपलोड करते हुए लिखा कि, यह स्टूडेंट्स बहुत ही मेहनती और होनहार है। वे 12 घंटे की शिफ्ट में काम करते हैं फिर 2 घंटे बस की यात्रा कर कॉलेज आते हैं।

यह जिंदगी पंजाब से केनेडा गए कई छात्रों की है। पंजाब में विदेश जाने का काफी चलन है। इसका मुख्य कारण है बेरोजगारी और अविश्वसनीय भविष्य।

कोई भी माता-पिता अपने बच्चों को पैसे लगाकर विदेश पढ़ने भेजते हैं। मगर उन छात्रों को वहां रहन-सहन की लागत को पूरा करने के लिए होटल्स, स्टोर और भी कई जगह पर अत्यधिक काम करना पड़ता है। बहुत से लोग इन छात्रों की मजबूरी का फायदा उठाते हैं। और आधे वेतन पर उनसे ज्यादा काम कराया जाता है।

आजकल विदेश जाकर पढ़ने का चलन काफी ज्यादा बढ़ गया है। एक अनुमान के अनुसार हर साल लगभग 4.43 मिलियन लोग दूसरे देश पढ़ने जाते हैं। यह छात्र ज्यादातर पढ़ने के लिए ऑस्ट्रेलिया जाते हैं।

इसके बाद इस लिस्ट में ब्रिटेन, स्विट्ज़रलैंड, न्यूजीलैंड और आरआईए ऑस्ट्रिया का स्थान आता है। बता दें कि विदेश जाने वाले छात्रों में से आधे से ज्यादा छात्र एशियाई होते हैं।

वैश्विक अर्थव्यवस्था के इस नए युग में, मल्टीनेशनल कंपनियां ऐसे लोगों को अपने कंपनी में लेना पसंद करती हैं जो विभिन्न देशों में काम कर सकें। कई भाषाएं बोलें, विभिन्न क्षेत्रों के लोगों के साथ संवाद करें।

अमेरिका में इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन से संबद्ध डेनियल ओब्स्ट का कहना है कि वैश्वीकरण के इस युग में सफल होने के लिए हर छात्र को विदेश में पढ़ाई करनी चाहिए। इससे वे विभिन्न भाषाओं और संस्कृतियों के लोगों के साथ तालमेल बिठाना सीख सकेंगे। उनके लिए मल्टीनेशनल कंपनियों में काम करना सरल हो जाएगा।

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