कठिन परिश्रम वह चाबी है, जो किस्मत का दरवाजा खोल देती है. सच्चे लगन, धैर्य और मेहनत के बल पर ही सफलता संभव है.ऐसी ही एक छोटे से गांव की लड़की है वनमती जिसने देश की सबसे कठिन परीक्षा को पास कर अपने गांव का नाम रोशन किया. भारत में सिविल सेवा परीक्षा को सबसे कठिन परीक्षा माना जाता है .

क्योंकि इसे पास कर लेने के बाद व्यक्ति आईएएस या आईपीएस ऑफिसर बनता है. वनमती ने सिविल सेवा परीक्षा पास ही नहीं की बल्कि अच्छी रैंक प्राप्त की . आज के आर्टिकल में हम आपको बताएंगे कि किस तरह गाय भैंस चराने वाली एक लड़की आईपीएस ऑफिसर बनी. चलो हम आपको बता बताते हैं उनके सफलता की कहानी..

कठिन परिस्थितियों में गुजरा बचपन

केरल के इरोड जिले की रहने वाली वनमती एक साधारण परिवार की लड़की है जो प्रायः ऐसे गांव से है जो अविकसित है . गांव में वनमती का बचपन गाय, भैंस और पालतू जानवरों को चराने में बीता है. वनमती के पिताजी के पास बहुत कम खेती थी जोकि घर खर्च के लिए काफी नहीं थी .इसलिए वह टैक्सी चलाने के लिए शहर चले गए. पिता के शहर जाने के बाद घर के छोटे खर्चों को पूरा करने के लिए कुछ पशुओं को पाला गया जिनको चराने का काम वनमती करती थी.

पशुपालन का काम बड़ा ही मुश्किल होता है उन्हें सुबह और शाम चराने के लिए ले जाना पड़ता है उनकी साफ सफाई करनी पड़ती है यह सभी काम वनमती के जिम्मे था. वनमती यह सभी काम अपनी मां का हाथ बटाने के लिए करती थी जिसे उसने लंबे समय तक किया जब तक वह बड़ी नहीं हुई. वनमती सुबह स्कूल जाती और स्कूल से आने के बाद मवेशियों को चराने जाती थी और बचे हुए समय में वह पढ़ाई करती करती थी.

पढ़ाई के साथ घर का खर्च भी चलाया

गांव के सरकारी स्कूल से वनमती ने अपनी पढ़ाई पूरी की उसके बाद उसने कॉलेज की पढ़ाई अपने कस्बे से की. कॉलेज की पढ़ाई के बाद पोस्ट ग्रेजुएशन कंप्यूटर एप्लीकेशन में पूरा किया. पोस्ट ग्रेजुएशन पूरा कर लेने के बाद वनमती ने प्राइवेट बैंक में नौकरी शुरू कर दी जिससे वह बेहतर तरीके से अपने परिवार की मदद कर सके. परिवार की आर्थिक हालत कमजोर थी और वनमती को बैंक से अच्छी तनख्वाह मिल रही थी इसलिए वनमती नौकरी के लिए मना नहीं कर पाई .

वनमती का असली मकसद तो सिविल सेवा परीक्षा को पास कर बड़ा अधिकारी बनना था. वनमती ने बैंक की नौकरी के साथ-साथ सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी के लिए कुछ पैसे जोड़े ताकि तैयारी के लिए उसे कोई परेशानी ना हो. वनमती ने बहुत मेहनत और लगन से तैयारी की थी वनमती अपने पहले और दूसरे प्रयास में सफल नहीं हो पाई लेकिन 2015 की सिविल सेवा परीक्षा में उसने 152 वी रैंक हासिल की. वनमती की इस उपलब्धि से गांव वाले अचंभित हो गए और उन्होंने वनमती और उसके परिवार को खूब बधाइयां दी.

भारत में सिविल सेवा परीक्षा को सबसे कठिन परीक्षा माना जाता है क्योंकि इसे पास कर लेने के बाद व्यक्ति आईएएस या आईपीएस ऑफिसर बनता है. वनमती ने सिविल सेवा परीक्षा पास ही नहीं की बल्कि अच्छी रैंक प्राप्त की अपने हौसले को बुलंद रखकर अपने मेहनत और लगन से आईपीएस बनकर न केवल अपने परिवार का बल्कि पूरे गांव का नाम रोशन किया. वनमती सभी लड़कियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई.

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