देखिए ये कहना उचित नहीं होगा कि ज़्यादातर हार्ट अटैक बाथरूम में आते है ,हा ये ज़रूर केह सकते है कि काफी हार्ट अटैक की घटनाएं बाथरूम में होती है।अब पहले ये समझ लीजिए कि हार्ट अटैक क्यों होता है।जब आपके दिल के माशपेशियो की धमनियों या arteries में किसी प्रकार की रुकावट हो जाती है और उससे दिल के धड़कने की क्षमता प्रभावित होती है तो हार्ट अटैक आता है।

सबसे ज़्यादा हार्ट अटैक देर रात या भोर में आते है।ऐसा इसलिए होता है कि जब आप सो रहे होते है तो मस्तिष्क से मिलने वाले सिग्नल नींद में बहुत कम हो जाते है जिसकी वजह से दिल की माष्पेशियो की धमनिया पर्याप्त मात्रा में खून दिल तक नहीं पहुंचा पाती हैं और फिर दिल पूरे शरीर में खून नहीं पहुंचा पाता है।

बाथरूम में भी हार्ट अटैक की ज़्यादा घटनाओं के पीछे ये कारण है आमतौर पर बाथरूम का तापमान सामान्य कमरों की बजाय थोड़ा ज़्यादा ठंडा होता है।दिल के मरीज यदि किसी भी प्रकार से थोड़ी भी ज़्यादा ठंड की गिरफ्त में आ जाए तो उनके दिल को ज्यादा काम करना पड़ता है क्युकी ठंड की वजह से बाकी शरीर की धमनिया बिल्कुल सिकुड़ जाती है और दिल को खून पहुंचने के लिए ज्यादा बार धड़कना पड़ता हैं जो कि ऐसे मरीजों के लिए बहुत घातक है।इसीलिए आप ने सुना होगा की सर्दी के मौसम में बहुत से दिल के मरीज गुजर जाते है।

शोधकर्ताओं ने गर्मियों के महीनों के दौरान ऐसा करने की तुलना में सर्दियों में स्नान करते समय कार्डियक अरेस्ट होने की संभावना लगभग 10 गुना बढ़ गई। अध्ययन में लगभग 11,000 रोगियों के डेटा को देखा गया था, जिन्हें 2005 और 2007 के बीच दिल का दौरा पड़ा था।

यह पाया गया कि 22 फीसदी हमले के दौरान सो रहे थे, नौ फीसदी नहा रहे थे, तीन फीसदी काम पर थे और आधे फीसदी लोग व्यायाम कर रहे थे।बाकी एक अज्ञात गतिविधि पर थे, चिका निशियामा और जापान में क्योटो प्रीफेक्चुरल विश्वविद्यालय के सहयोगियों ने पुनर्जीवन पत्रिका में लिखा था।

अत: यह कहना कि ज्यादातर मौतें बाथरूम में नहाते हुए होती हैं सही नहीं है।शोधकर्ताओं ने प्रत्येक गतिविधि के प्रति घंटे हृदय प्रतिघात की दर को भी देखा। उन्होंने पाया कि स्नान 10 मिलियन लोगों में 54 प्रतिघात के साथ शीर्ष पर आया, जबकि 10 मिलियन लोगों में सिर्फ 10 गिरफ्तारियों के साथ व्यायाम किया गया।

उन्होंने कहा कि स्नान करते समय दिल का दौरा पड़ने का जोखिम अधिक होता है अगर यह ठंड का दिन होता है, तो उन्होंने कहा।यह सोचा जाता है कि शरीर के तापमान में अचानक परिवर्तन से आघात होता है, जिससे रक्तचाप में तेजी से गिरावट हो सकती है जो हृदय को तनाव देता है।

रिपोर्ट में कहा गया है, “बाथरूम और दालान को गर्म करने या गहरी गर्म स्नान से परहेज करने से रोकना उच्च जोखिम वाले लोगों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है,” रिपोर्ट में कहा गया है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *