दोस्तों हमने सुना होगा की चन्दन के पद पर सांप रहते हैं तो आपके मन में ये सवाल ज़रूर आया होगा की फिर चन्दन को कटा कैसे जाता होगा। आज हम आपको बताएँगे की क्या सच में ऐसा होता हैं।

सबसे पहले एक दोहा प्रस्तुत करना चाहूंगी जो रहीमदास जी का है, जो रहीम उत्तम प्रकति, का करि सकत कुसंग, चंदन विष व्यापे नहीं, लिपटे रहत भुजंग। इसका भावार्थ यह है कि बुरे लोगों की संगति अच्छे लोगों में खामियाँ पैदा नहीं कर सकती, ठीक वैसे ही चंदन के पेड़ पर सांप के लिपटने से पेड़ को ज़हरीला नहीं कर सकती।

जी हाँ सच में साँप चन्दन के पेड़ से लिपटे रहते है साँपो में सूँघने की शक्ति होती है यह बात विज्ञान द्वारा प्रमाणित है, बल्कि कहना चाहिए की सांप सबसे अच्छी घ्राणशक्ति वाले जीवों में से एक है। ये ना केवल अपने nostrils बल्कि जीभ के ऊपरी हिस्से से भी सूंघ सकते है यानी कभी आपको सांप घूरे तो समझाना वह आपको सूंघने की कोशिश कर रहा है।

और यह केवल चंदन ही नहीं रजनीगंधा, चमेली के पेड़ों पर रहना भी पसन्द करते है ऐसा माना जाता है कि इन पेड़ों की ख़ुशबू साँपो को आकर्षित करती है यह बात कुछ हद तक सही भी है॥

अब बात आती है यह पेड़ो में रहना क्यों पसन्द करते है

आयरलैंड न्यूज़ीलैंड, ऊत्तरी दक्षिणी ध्रुवों जैसे कुछ देशों को छोड़कर साँप पूरी दुनिया में पाए जाते है। पृथ्वी परआये शुरुवाती जीवन का हिस्सा रहा और यह जंतु आमतौर पर ठण्डी और अन्धेरी जगह में रहना पसन्द करते है॥

इसकी वज़ह है इसका ectotherm होना, ectotherm यानी ऐसे जीव जो अपने शरीर का तापमान नियंत्रित रखने के लिए बाहरी चीज़ों पर निर्भर रहते है, इस श्रेणी में सांप, कछुआ, घड़ियाल और छिपकली जैसे जीव आते है॥इस तरह के जीव हमेशा बिल, झाड़ी, पानी और चटानो के नीचे पाए जाते है। चंदन, चमेली, रजनीगंधा पेड़ो का तापमान बाक़ी के पेड़ों से कम रहता है इसलिए इन्हें यह पेड़ आकर्षित करते है। और साँप यहाँ अपना बसेरा बना लेते है।

कुछ लोगों का ऐसा मानना हैं दरअसल यह मिथक कैसे प्रचलित हुआ यही एक पहेली है। वास्तविकता यह है कि चंदन के पेड का वह हिस्सा जो भूमि के नीचे होता है, जैसे तने का कुछ हिस्सा व जड, उनमे ही ख़ुशबू होती है।

 पेड़ को काटने के बजाए जड़ से ही उखाड़ा जाता है। उखाड़ने के बाद इसे टुकड़ों में काटा जाता है। ऐसा करके रसदार लकड़ी को कर लिया जाता है। एवरेज कंडीशन में एक चंदन के पेड़ से करीब 40 किलो तक अच्छी लकड़ी निकल जाती है।

चंदन के पेड़ में सबसे महंगी चीज इसका तेल होता है। एक पेड़ की जड़ से करीब पौने 3 लीटर तक तेल निकलता है। चंदन की खेती को बढ़ावा देने के लिए कई प्रदेशों में यह प्रावधान किया गया है कि चंदन उगाने वाले किसान उसे काट सकेंगे लेकिन इसकी परमिशन लेनी जरूरी होगी।

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